Wednesday, November 16, 2011
Saturday, November 12, 2011
Thursday, November 13, 2008
Tuesday, March 11, 2008
नौकरी
चार साल से भटक रहा हूँ करके एम ए पास ।
मिली न नौकरी आज तक कितना किया तलाश ॥
मिली न नौकरी आज तक कितना किया तलाश ॥
एक कही स्थान अगर हो, आते लाखो अर्जी ।
लेकिन वही है चुना जाता , जो होता उसमे फर्जी ॥
सोच रहा हूँ कैसे चलेगी घर की रोटी दाल ।
चिंता में नौकरी के झड़ गए सिर के सारे बाल ॥
अब महसूस हुआ बेकाम की , अपनी रही पढ़ाई ।
जिसके चलते टूट गयी , अपनी हुई सगाई ॥
दुल्हन ने कहा बेरोजगार से शादी नही है करनी ।
padke तेरे चक्कर में ,मुझको नही है मरनी ॥
न जाने कब खत्म होगी ये , नौकरी की मारा मारी ।
मौला मेरे लिफ्ट कराके , लादे मेरी बारी ॥
अगर किसी के पास हो देके , रोके मेरी बर्बादी ।
वरना कवारा मर जाऊँगा , होगी कभी न शादी ॥
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Sunday, March 9, 2008
विद्यार्थी -परिचय
पढ़ना और पढाना अब नही इनके बस की बात ।
इनका सारा वक्त गुजरता गर्ल फ्रेंड के साथ ॥
नए -नए से शौक है इनके , उल्टे सीधे खर्चे ।
ये है आज के विद्यार्थी का सीधा सदा परिचय ॥
शिक्षा से नही दूर -दूर तक , इनका कोई नाता ।
ज्ञान की बात तनिक भी इनके ,समझ में नही आता ॥
कापी और किताबो से ये रहते कोसो दूर ।
घूमना फिरना शौक है इनके ,मौज करे भरपूर ॥
एक भी प्रश्न का आता जाता ,इनको नही जवाब ।
जैसे तैसे पास परीक्षा , करना इनका ख्वाब ॥
एक ही क्लास में,कई साल तक ,खाते रहते गोते ।
विद्यार्थी का अर्थ जो ,मृत विद्या का अर्थी ढोते॥
ज्ञान से दूर सदा ये रहते ,फिल्मी धून में मस्त।
फ़िर भी कहते पढ़ते -पढ़ते ,हो गई तबियत पस्त ॥
ख्वाबो की दुनिया में रहते है , छोड़ के मौलिकता को ।
आधुनिकता की करे दुहाई , मूल के नैतिकता को ॥
नो टेंसन मैं हू ना , ये है इनके बोल ।
करते धरते कुछ नही , बाधे तगड़ी पोल ॥
क्या कर सकते है ,या क्या करने के काबिल ।
कभी समझ में नही है आया ,कहा है इनकी मंजिल ॥
काटते रहते रात दिन बस , गलियों के ही चक्कर ।
पढ़ते और पढाते ये बस , प्रेम के ढाई अक्षर ॥
पढ़ना और पढाना अब नही इनके बस की बात ।
इनका सारा वक्त गुजरता गर्ल फ्रेंड के साथ ॥
नए -नए से शौक है इनके , उल्टे सीधे खर्चे ।
ये है आज के विद्यार्थी का सीधा सदा परिचय ॥
शिक्षा से नही दूर -दूर तक , इनका कोई नाता ।
ज्ञान की बात तनिक भी इनके ,समझ में नही आता ॥
कापी और किताबो से ये रहते कोसो दूर ।
घूमना फिरना शौक है इनके ,मौज करे भरपूर ॥
एक भी प्रश्न का आता जाता ,इनको नही जवाब ।
जैसे तैसे पास परीक्षा , करना इनका ख्वाब ॥
एक ही क्लास में,कई साल तक ,खाते रहते गोते ।
विद्यार्थी का अर्थ जो ,मृत विद्या का अर्थी ढोते॥
ज्ञान से दूर सदा ये रहते ,फिल्मी धून में मस्त।
फ़िर भी कहते पढ़ते -पढ़ते ,हो गई तबियत पस्त ॥
ख्वाबो की दुनिया में रहते है , छोड़ के मौलिकता को ।
आधुनिकता की करे दुहाई , मूल के नैतिकता को ॥
नो टेंसन मैं हू ना , ये है इनके बोल ।
करते धरते कुछ नही , बाधे तगड़ी पोल ॥
क्या कर सकते है ,या क्या करने के काबिल ।
कभी समझ में नही है आया ,कहा है इनकी मंजिल ॥
काटते रहते रात दिन बस , गलियों के ही चक्कर ।
पढ़ते और पढाते ये बस , प्रेम के ढाई अक्षर ॥
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Monday, March 3, 2008
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