Sunday, March 9, 2008

विद्यार्थी -परिचय
पढ़ना और पढाना अब नही इनके बस की बात ।
इनका सारा वक्त गुजरता गर्ल फ्रेंड के साथ ॥
नए -नए से शौक है इनके , उल्टे सीधे खर्चे ।
ये है आज के विद्यार्थी का सीधा सदा परिचय ॥
शिक्षा से नही दूर -दूर तक , इनका कोई नाता ।
ज्ञान की बात तनिक भी इनके ,समझ में नही आता ॥
कापी और किताबो से ये रहते कोसो दूर ।
घूमना फिरना शौक है इनके ,मौज करे भरपूर ॥
एक भी प्रश्न का आता जाता ,इनको नही जवाब ।
जैसे तैसे पास परीक्षा , करना इनका ख्वाब ॥
एक ही क्लास में,कई साल तक ,खाते रहते गोते ।
विद्यार्थी का अर्थ जो ,मृत विद्या का अर्थी ढोते॥
ज्ञान से दूर सदा ये रहते ,फिल्मी धून में मस्त।
फ़िर भी कहते पढ़ते -पढ़ते ,हो गई तबियत पस्त ॥
ख्वाबो की दुनिया में रहते है , छोड़ के मौलिकता को ।
आधुनिकता की करे दुहाई , मूल के नैतिकता को ॥
नो टेंसन मैं हू ना , ये है इनके बोल ।
करते धरते कुछ नही , बाधे तगड़ी पोल ॥
क्या कर सकते है ,या क्या करने के काबिल ।
कभी समझ में नही है आया ,कहा है इनकी मंजिल ॥
काटते रहते रात दिन बस , गलियों के ही चक्कर ।
पढ़ते और पढाते ये बस , प्रेम के ढाई अक्षर ॥

1 comment:

Anonymous said...

good hindi poem
very goods frieds