Tuesday, March 11, 2008

नौकरी

चार साल से भटक रहा हूँ करके एम ए पास ।
मिली न नौकरी आज तक कितना किया तलाश ॥

एक कही स्थान अगर हो, आते लाखो अर्जी ।

लेकिन वही है चुना जाता , जो होता उसमे फर्जी ॥

सोच रहा हूँ कैसे चलेगी घर की रोटी दाल ।

चिंता में नौकरी के झड़ गए सिर के सारे बाल ॥

अब महसूस हुआ बेकाम की , अपनी रही पढ़ाई ।

जिसके चलते टूट गयी , अपनी हुई सगाई ॥

दुल्हन ने कहा बेरोजगार से शादी नही है करनी ।

padke तेरे चक्कर में ,मुझको नही है मरनी ॥

न जाने कब खत्म होगी ये , नौकरी की मारा मारी ।

मौला मेरे लिफ्ट कराके , लादे मेरी बारी ॥

अगर किसी के पास हो देके , रोके मेरी बर्बादी ।

वरना कवारा मर जाऊँगा , होगी कभी न शादी ॥

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